World Day for Safety and Health at work - सुरक्षा और स्वास्थ्य

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हर दिन लोग ज्यादातर समय, उस संगठन या कार्यस्थल पर व्यतीत करते हैं जहां वे पैसा कमाने के लिए काम करते हैं, इसलिए कार्यस्थल पर स्वास्थ मानकों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना, और बीमारी को रोका जा सके। व्यावसायिक दुर्घटनाओं और बीमारियों की रोकथाम को बढ़ावा देने के लिए हर साल 28 अप्रैल को विश्व स्तर पर World Day for Safety and Health at work यानि कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य ध्यान रखने के लिए विश्व दिवस मनाया जाता है। 

काम से जुड़ी बीमारियों और कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं की वजह से हर साल करीब 20 लाख लोगों की मौत हो रही है। ये खुलासा संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) की दो एजेंसियों ने किया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization) ने कार्यस्थल पर अलग-अलग मुश्किलों का सामना कर रहे कर्मियों पर रिसर्च की जिसमें पाया गया है कि कार्यस्थल पर वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और काम की लंबी अवधि जैसे रिस्क फैक्टर (Risk factor) की वजह से कर्मचारी अपनी जान गंवा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरी के दौरान होने वाली बीमारियां और दुर्घटनाएं एम्प्लाइज की मौत का कारण बन रही हैं। अगर बात करें 2016 की तो उस साल दुनिया भर में इसकी वजह से 20 लाख लोगों की मौत हुई थी। साल 2020 और 2016 के बीच जब कर्मचारियों की बीमारियों की मॉनिटरिंग की गई तो रिसर्च से पता चला कि ज्यादातर कर्मचारियों ने सांस और दिल के रोग की वजह से जान गंवायी।

25 सितंबर, 2015 को अपनाया गए सतत विकास के लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) में संयुक्त राष्ट्र ने 2030 एजेंडा में गरीबी को समाप्त करने, ग्रह की रक्षा करने, अच्छा काम और आर्थिक विकास के साथ अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण को भी शामिल किया गया।  

क्यों मनाया जाता है यह दिवस?

व्यावसायिक दुर्घटनाओं और बीमारियों की रोकथाम को बढ़ावा देने के लिए हर साल 28 अप्रैल को विश्व स्तर पर World Day for Safety and Health at work यानि कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य ध्यान रखने के लिए विश्व दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है कि कार्यस्थलों पर सभी कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि किसी को भी सेहत या स्वास्थ्य से संबंधित हानि ना हो। इसके साथ ही सभी कर्मचारी या वर्कर्स अपना काम एक हेल्दी, सेफ और पॉजिटिव वातावरण में कर सकें। खासकर इस बात का ध्यान रखना है कि वर्क प्लेस पर किसी भी तरह की कोई दुर्घटना ना घटे, कोई इंफेक्शन, डिजीज का प्रसार ना हो। इन्हीं सावधानियों को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस सेलिब्रेट किया जाता है। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई तरह के प्रोग्राम, कैंपेन भी आयोजित किये जाते हैं। इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा काम पर दुर्घटनाओं और बीमारियों की रोकथाम को उजागर करने और व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। 

कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य वह पहल है जिसमें सभी स्तरों पर एक सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण को स्थापित करने का प्रयास किया जाता है। जहां सरकारें, एम्प्लाइज और वर्कर्स अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों की एक प्रणाली के माध्यम से एक सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण हासिल करने में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। 

इतिहास:

कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस (World Day for Safety and Health at Work), पहली बार 28 अप्रैल 2003 को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization) द्वारा मनाया गया था। वर्ष 2003 में शुरू हुई यह पहल दुनिया भर में वर्क प्लेस पर सुरक्षित, स्वस्थ और अच्छे काम को बढ़ावा देने के लिए एक अभियान के रूप में शुरू की गयी थी। 

थीम 2022:

हर साल 28 अप्रैल 2022 को कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य दिवस की थीम "Participation And Social Dialogue In Creating A Positive Safety And Health Culture" है, यानि "सकारात्मक सुरक्षा और स्वास्थ्य संस्कृति बनाने के लिए भागीदारी और सामाजिक संवाद करना"। 

कॉर्पोरेट सेक्टर में वर्कर्स की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए जरूरी कदम 

  • अभी भी पूरी तरह से कोरोना गया नहीं है इसलिए कोरोना महामारी से सुरक्षा के लिए सभी हमेशा मास्क पहनें और थोड़े-थोड़े अंतराल पर ऑफिस के डेस्क, सीट और अन्य चीजों के सैनिटाइज करते रहें। अगर किसी में कोरोना के लक्षण दिखाई दे रहे हैं या तबियत ठीक नहीं है तो उन्हें वर्क फ्रॉम होम करना चाहिए। 

  • अगर आपके कर्मचारी घरों से काम कर रहे हैं तब भी आप उन्हें हर तरह से सपोर्ट करते रहें। काम से संबंधित उनकी सभी जरूरतों जैसे wifi और phone recharge आदि को पूरा करें साथ ही, टीम में पॉजीटिव माहौल बनाने का प्रयास करें। 

  • कार्यस्थल पर सुरक्षा के साथ सेहत पर भी ध्यान देना आवश्यक है। इसलिए ध्यान रखें कि वर्कप्लेस पर ऐसा कुछ न हो जो डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रूप से आपके कर्मचारियों की सेहत को नुकसान पहुंचाए। खाने-पीने की गुणवत्ता का भी ध्यान रखें। 

  • Employees की शारीरिक सेहत के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी जरूरी है। आज के समय में खासतौर पर मानसिक सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। अतः कर्मचारियों को मानसिक तौर पर स्वस्थ रखने के लिए ऑफिस के माहौल को सकारात्मक और खुशनुमा बनाना आवश्यक है। इसके अलावा बीच - बीच में काम से अलग भी छोटी - छोटी मीटिंग्स रखें और सबके साथ मस्ती - मजाक का माहौल बनाए रखें। 

  • सभी ऑफिस कर्मचारियों के लिए बीच - बीच में किसी एक्सपर्ट के साथ मेंटल हेल्थ पर काउंसलिंग सेशन भी होने चाहिए। साथ - साथ सामान्य हेल्थ चेकअप कराने पर भी जोर दिया जाना चाहिए ताकि समय पर उन्हें मदद मिल सके। 

  • अपने Employees को वर्क लाइफ बैलेंस करने में मदद करें। उन्हें काम में एफिशिएंट होने के लिए प्रेरित करें ताकि वे अपनी ऑफिस टाइमिंग्स में अपना काम खत्म करें और साथ ही , खुद को भी उचित समय दे सकें। 

भारत सरकार द्वारा वर्कर्स के लिए उठाये गए कदम:

संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों को मिलाकर भारत में लगभग 50 करोड़ श्रमिक वर्ग है। इसमें एक बहुत बड़ा वर्ग, जो कि लगभग 90 फीसदी है वह असंगठित क्षेत्र में है। भारत सरकार (Indian Government) द्वारा कुछ श्रम कानून बनाये गए हैं और यह सु‎नि‎श्चित किया गया है कि सभी श्र‎मिकों को श्रम कानूनों का लाभ‎ मिलेगा। सशक्त, खुशहाल और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए श्रमिकों के सशक्तीकरण की जरुरत है, जिसमे उनका स्वास्थ्य और सुरक्षा भी शामिल है। आजादी के इतने साल बाद भी लगभग 90 फीसदी वर्कर्स असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं ‎जिनको अभी भी सभी सामा‎जिक सुरक्षा सुविधाएं प्राप्त नहीं हैं। इसके लिए भारत सरकार ने 29 कानूनों को अब सिर्फ चार कोड (वेज कोड, सामाजिक सुरक्षा कोड, ओएसएच कोड और आईआर) में समाहित कर बेहतर कार्य करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है ताकि सभी वर्कर्स को सम्मान के साथ सुरक्षा, सेहत और सहूलियत भी सहजता से मिले। 

भारत में प्रमुख श्रम कानून (major Labour law in India) 

  • श्रमिक मुआवजा एक्ट  

  • द ट्रेड यूनियंस एक्ट 

  • मजदूरी भुगतान एक्ट   

  • औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम  

  • भारतीय औद्योगिक विवाद एक्ट 

  • न्यूनतम मजदूरी एक्ट  

  • कारखाना एक्ट 

  • मातृत्व लाभ अधिनियम 

  • बोनस  भुगतान एक्ट  

  • MRTU और PULP एक्ट

  • पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट श्रम कानून अनुपालन नियम  

  • कर्मचारी भविष्य निधि  

  • कर्मचारी राज्य बीमा  

  • सामूहिक सौदेबाजी  

  • असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा एक्ट

  • कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) एक्ट

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